CBSE Class 12 Re-evaluation Results 2026 को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ रही है। JoSAA काउंसलिंग शुरू हो चुकी है और संशोधित परिणामों का इंतजार कर रहे छात्र दाखिले को लेकर परेशान हैं।
सीबीएसई कक्षा 12 के री-वैल्यूएशन परिणामों का इंतजार इस समय लाखों छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। एक तरफ देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों जैसे आईआईटी, एनआईटी और अन्य तकनीकी कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों छात्र अपने संशोधित अंकों का इंतजार कर रहे हैं। कई विद्यार्थियों को उम्मीद है कि री-वैल्यूएशन के बाद उनके अंक बढ़ सकते हैं, जिससे उनके लिए बेहतर कॉलेजों के दरवाजे खुल सकते हैं।
JoSAA काउंसलिंग शुरू
आईआईटी, एनआईटी और अन्य भाग लेने वाले संस्थानों में प्रवेश के लिए संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण यानी JoSAA की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। JoSAA 2026 के तहत पंजीकरण और विकल्प भरने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसकी आखिरी तारीख 11 जून को बताई जा रही है। सभी योग्य उम्मीदवारों के लिए इस काउंसलिंग में पंजीकरण करना अनिवार्य है। ऐसे में जिन छात्रों ने अपने बोर्ड परिणामों के री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन किया है, वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं संशोधित परिणाम आने में देरी उनके दाखिले की संभावनाओं को प्रभावित न कर दे।
शिक्षा मंत्रालय ने दिए तालमेल के संकेत
हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र ने संकेत दिया कि अधिकारियों को सीबीएसई की प्रक्रियाओं को जेईई एडवांस्ड, सीयूईटी और अन्य प्रमुख प्रवेश प्रक्रियाओं के साथ बेहतर तालमेल में लाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बयान के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच उम्मीद जगी है कि री-वैल्यूएशन कराने वाले विद्यार्थियों को काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा और संशोधित परिणाम जारी होने के बाद उन्हें अपने अद्यतन अंकपत्र जमा करने की अनुमति दी जा सकती है।
इस साल रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे आवेदन
शिक्षा मंत्री के अनुसार इस वर्ष लगभग 12 लाख स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की मांग छात्रों द्वारा की गई है। वहीं करीब चार लाख विद्यार्थियों ने सत्यापन और री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन किया है।गौरतलब है कि यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। इसके पीछे सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे सवालों और छात्रों की बढ़ती चिंताओं को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
छात्रों ने उठाए कई सवाल
कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण उनके परिणाम प्रभावित हुए। इसके अलावा कई विद्यार्थियों ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त करने में तकनीकी दिक्कतों की भी शिकायत की है। छात्रों के अनुसार पोर्टल पर लॉगिन संबंधी समस्याएं और अन्य तकनीकी खामियों के कारण उन्हें आवश्यक दस्तावेज समय पर नहीं मिल सके। इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने के कारण यह चिंता और बढ़ गई है कि यदि री-वैल्यूएशन परिणाम देर से आते हैं तो कई छात्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कब आ सकते हैं संशोधित परिणाम?
सीबीएसई ने अभी तक री-वैल्यूएशन के बाद संशोधित परिणाम जारी करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। हालांकि वर्तमान स्थिति और लंबित आवेदनों की संख्या को देखते हुए माना जा रहा है कि संशोधित अंकपत्र जून के दूसरे पखवाड़े में जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल बोर्ड सत्यापन और री-वैल्यूएशन से जुड़े आवेदनों की जांच में जुटा हुआ है। अंतिम समयसीमा इस प्रक्रिया के पूरा होने पर निर्भर करेगी।
75 प्रतिशत अंक वाले नियम पर टिकी कई छात्रों की उम्मीद
सबसे ज्यादा चिंता उन छात्रों को है जिन्होंने जेईई एडवांस्ड परीक्षा तो पास कर ली है, लेकिन कक्षा 12 में 75 प्रतिशत अंकों की अनिवार्य पात्रता से थोड़ा पीछे रह गए हैं। ऐसे विद्यार्थियों को उम्मीद है कि री-वैल्यूएशन के बाद उनके अंक बढ़ सकते हैं और वे आईआईटी में प्रवेश के लिए पात्र हो सकते हैं। यही कारण है कि हजारों छात्र अपने संशोधित परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
उधर JoSAA 2026 के तहत पंजीकरण और विकल्प भरने की अंतिम तिथि 11 जून निर्धारित है। ऐसे में री-वैल्यूएशन कराने वाले छात्रों की निगाहें अब सीबीएसई की अगली घोषणा पर टिकी हुई हैं।



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