Delhi Central Sanskrit University Scholarship Yojna: केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी संस्कृत छात्रों को 5000 से 35000 तक स्कॉलरशिप देने की योजना बनाई है. इसके आवेदन की अंतिम तारीख 30 जून रखी गई है. यहां 9वीं क्लास से लेकर पीएचडी तक के स्टूडेंट को स्कॉलरशिप दी जाएगी.
नई दिल्ली : देश में संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षकों, अध्यापकों और प्रोफेसर के साथ-साथ संस्कृत पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. संस्कृत का अध्ययन करने वाले लोगों को दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बंपर अनुदान और स्कॉलरशिप प्रदान कर रहा है, जिसमें आवेदन करने की अंतिम तारीख अलग-अलग रखी गई है. स्कॉलरशिप में आवेदन करने की अंतिम तारीख 30 अगस्त रखी गई है. जबकि अध्यापकों और टीचर्स के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 30 जून रखी गई है. इसमें आवेदन करने के लिए आपको विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.sanskrit.nic.in/schemes पर जाना होगा. इस संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए लोकल 18 की टीम ने केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी के निदेशक केंद्रीय योजना के प्रो. मधुकेश्वर भट्ट से बातचीत की. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा.
5000 से लेकर 35000 रुपए तक है स्कॉलरशिप
केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी के निदेशक केंद्रीय योजना के प्रो. मधुकेश्वर भट्ट ने बताया कि छात्र-छात्राओं के लिए स्कॉलरशिप यूनिवर्सिटी की ओर से दी जाती है. इसमें 99वीं क्लास से लेकर दसवीं क्लास तक 5000 और 11वीं से लेकर 12वीं क्लास तक 6000 रुपए और बीए करने वाले छात्र-छात्राओं को 8000 रुपए, जबकि एमए करने वाले छात्र-छात्राओं को 10000 रुपए और पीएचडी करने वाले छात्र-छात्राओं को हर साल 35000 रुपए दिए जाते हैं.
इसके अलावा वोकेशनल ट्रेनिंग जो भी संस्कृत इंस्टीट्यूशंस कराते हैं. उनको 100000 यानी एक लाख रुपए प्रति ट्रेनिंग का अनुदान यूनिवर्सिटी की ओर से दिया जाता है. इसके अलावा पब्लिकेशन यानी संस्कृत की बुक्स को जो भी रिप्रिंट करता है या पब्लिकेशन पर काम करता है, उनको भी अनुदान दिया जाता है.
संस्कृत के अध्यापकों के लिए है इतना अनुदान
केंद्रीय संस्कृत यूनिवर्सिटी के निदेशक केंद्रीय योजना के प्रो. मधुकेश्वर भट्ट ने बताया कि शिक्षक उपलब्धि कराने के लिए योजना के तहत 20,000 रुपए की धनराशि दी जाती है. इसके अलावा एक सम्मान राशि योजना भी है जिसके तहत संस्कृत के जो विद्वान है उनको 60,000 रुपए 12 महीने तक दिया जाता है. इसके अलावा शास्त्र चूड़ामणि” योजना नाम से भी एक योजना है इसके तहत देश के प्रतिष्ठित और प्रख्यात सेवानिवृत्त (Retired) संस्कृत विद्वानों की सेवाओं का उपयोग शिक्षण कार्य के लिए किया जाता है, उनको 24 महीने 4,80000 अनुदान के रूप में दिए जाते हैं.
इसके अलावा अष्टादशी योजना जोकि मुख्य रूप से 18 विशेष प्रोजेक्ट जिसमें संस्कृत शिक्षा के आधुनिकीकरण, प्रचार-प्रसार, ग्रन्थ प्रकाशन, और डिजिटल संसाधनों के निर्माण के लिए 18 विशिष्ट उप-योजनाएं शामिल हैं, इसमें भी अनुदान देता है और यह अनुदान सबसे ज्यादा होता है. यह अनुदान लगभग 30 लाख रुपए का होता है.



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